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Chhattisgarh BJP : स्मृति ईरानी के सख्त तेवर, ‘मैडम’ शब्द पर भी जताई आपत्ति…

Smriti Irani

रायपुर। छत्तीसगढ़ भाजपा की प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी रायपुर दौरे के दौरान पार्टी संगठन को लेकर सख्त रुख अपनाती नजर आईं। भाजपा के प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में कार्यकर्ताओं और नेताओं की भीड़ देखकर उन्होंने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सभी की बैठक एक साथ निर्धारित नहीं है, तो इतनी बड़ी संख्या में लोगों के कार्यालय पहुंचने का औचित्य क्या है? उनके निर्देश के बाद परिसर में प्रवेश व्यवस्था को सख्त किया गया।

भीड़ जुटाने के बजाय बूथ पर काम करने की नसीहत

पार्टी कार्यालय पहुंचते ही स्मृति ईरानी ने वहां मौजूद कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की भीड़ पर सवाल खड़े किए। उन्होंने नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि बिना वजह कार्यालय में जमा होने के बजाय अपने-अपने बूथ पर जाकर संगठन का काम करें। इस दौरान उनके साथ फोटो खिंचवाने पहुंची एक महिला नेत्री को भी उन्होंने सेल्फी लेने से मना कर दिया।

‘मैडम’ कहने पर सोनिया गांधी का लिया नाम

संठन की बैठकों के दौरान स्मृति ईरानी ने संबोधन के तरीके पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने पार्टी के नेताओं को ‘मैडम’ शब्द का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी। इसी संदर्भ में उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश में एक ही मैडम हैं, वे सोनिया गांधी हैं। उनके इस बयान ने पार्टी कार्यालय में मौजूद नेताओं का ध्यान खींचा।

बैठक तय, तभी मिलेगा कार्यालय में प्रवेश

भाजपा कार्यालय में इस बार प्रवेश की व्यवस्था भी बदली हुई नजर आई। जिन नेताओं और पदाधिकारियों की बैठक जिस समय निर्धारित थी, उन्हें उसी समय परिसर में जाने दिया गया। सभी को एक साथ भीतर आने की अनुमति नहीं मिली। बैठक का समय आने तक कई नेताओं को बाहर इंतजार करना पड़ा।

बड़े नेताओं के वाहनों को भी नहीं मिली एंट्री

कार्यालय परिसर में वाहनों के प्रवेश को लेकर भी सख्ती बरती गई। मंत्री, विधायक और अन्य वरिष्ठ नेताओं के वाहनों को बाहर ही रोक दिया गया। मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक धरमलाल कौशिक, पूर्व मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय और भूपेंद्र सवन्नी समेत बैठक में पहुंचे कई नेताओं को अपने वाहन परिसर के बाहर छोड़ने पड़े।

पहले दिन बैठकों में संगठन पर रहा जोर

स्मृति ईरानी ने अपने प्रवास के पहले दिन सुबह से शाम तक संगठनात्मक बैठकें कीं। इन बैठकों में पार्टी की कार्यशैली, संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियों पर चर्चा हुई। उनके तेवरों से साफ संकेत मिला कि संगठन के कामकाज में अनुशासन और तय व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाएगी।

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