रायपुर, 13 जून। Congress Political Message : आगामी राजनीतिक समीकरणों और आदिवासी क्षेत्रों में बढ़ती सक्रियता के बीच कांग्रेस ने आदिवासी मुद्दों पर बड़ा दांव खेला है। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में आयोजित आदिवासी नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक में जल, जंगल, जमीन, आरक्षण, पेसा कानून, वनाधिकार पट्टा और आदिवासी पहचान जैसे मुद्दों पर मंथन हुआ। बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने 12 बिंदुओं का राजनीतिक प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया।
बैठक में पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव, पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू सहित प्रदेशभर के आदिवासी नेता, विधायक और पूर्व विधायक मौजूद रहे।
12 सूत्रीय राजनीतिक प्रस्ताव
1. हसदेव और बैलाडीला में खनन पर रोक
हसदेव अरण्य, परसा ईस्ट-केते बासन, केते एक्सटेंशन सहित नई कोयला खदानों और बैलाडीला में आयरन ओर खनन के लिए दी गई अनुमति रद्द की जाए।
हसदेव की 1,742 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन को निरस्त किया जाए।
2. 32% आरक्षण लागू किया जाए
अनुसूचित जनजाति (ST) को जनसंख्या के अनुपात में 32 प्रतिशत आरक्षण मिले।
राजभवन में लंबित आरक्षण विधेयक की अधिसूचना जारी की जाए।
3. वनाधिकार पट्टा वितरण
Forest Rights Act के तहत पात्र आदिवासियों को वनाधिकार पट्टे आवंटित किए जाएं।
4. नक्सल प्रभावित आदिवासियों का पुनर्वास
पलायन कर चुके आदिवासियों को वापस बसाया जाए।
नक्सल हिंसा और कथित फर्जी मुठभेड़ों से प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाए।
5. निर्दोष आदिवासियों की रिहाई
नक्सली सहयोगी बताकर जेल भेजे गए निर्दोष आदिवासियों को रिहा किया जाए।
25 हजार से अधिक आदिवासियों के खिलाफ जारी स्थायी और अस्थायी वारंट रद्द किए जाएं।
6. पारंपरिक अधिकारों की रक्षा
संविधान की पांचवीं अनुसूची, ग्राम सभा की सर्वोच्चता, पेसा कानून और वन अधिकार कानून का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
7. UCC से आदिवासियों को छूट
समान नागरिक संहिता (UCC) के दायरे से आदिवासी समाज को बाहर रखा जाए।
उनकी पारंपरिक विवाह, सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं की रक्षा की जाए।
8. स्थानीय रोजगार में प्राथमिकता
सरकारी नौकरियों और स्थानीय भर्ती में आदिवासियों को प्राथमिकता और आरक्षण मिले।
बस्तर और सरगुजा के बंद स्कूलों को खोलकर स्थानीय युवाओं की नियुक्ति की जाए।
9. पेसा कानून का कड़ाई से पालन
अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की सहमति के बिना भूमि अधिग्रहण या परियोजनाएं लागू न हों।
PESA Act और पंचायत राज अधिनियम का शत-प्रतिशत पालन हो।
10. संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण
आदिवासियों के विशेष संवैधानिक अधिकारों और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा की जाए।
बाहरी हस्तक्षेप से जनसांख्यिकी और सामाजिक संरचना को बचाया जाए।
11. ‘वनवासी’ शब्द का विरोध
आरएसएस और भाजपा द्वारा आदिवासियों को ‘वनवासी’ कहे जाने का विरोध।
आदिवासी पहचान को बनाए रखने की मांग।
12. जनगणना में अलग कॉलम
जनगणना 2026-27 में आदिवासियों की स्पष्ट पहचान के लिए अलग कॉलम बनाया जाए।
ताकि उनकी वास्तविक संख्या और पहचान दर्ज हो सके।

