Breaking
1 Mar 2026, Sun

thirdeyevision रत्नांचल जिला साहित्य व जनकल्याण समिति, गरियाबंद ने दी विनम्र श्रद्धांजलि!

रानुप्रिया(रायपुर):- वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रखर विचारक सुशील भोले के आकस्मिक निधन से साहित्य-जगत पर गहरा आघात पहुँचा है। सुशील भोले केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ी साहित्य और वैचारिक चेतना के एक जीवंत युग का अंत है। उन्होंने ‘मयारू माटी’ के माध्यम से न केवल छत्तीसगढ़ी पत्रकारिता को नई दिशा दी, बल्कि ‘आखर अंजोर’ जैसी कृतियों से हमारी मूल संस्कृति व आदिधर्म की पुनर्स्थापना के लिए जीवनपर्यंत संघर्ष किया।

रत्नांचल जिला साहित्य एवं जनकल्याण समिति, गरियाबंद द्वारा भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सुशील भोले की कृतियाँ आने वाली पीढ़ी के लिए मशाल का काम करेंगी – साहिर

वरिष्ठ साहित्यकार जयंत साहू ने बताया कि उनका जीवन साहित्य साधना व कठिन आत्म-साधना का एक अद्भुत संगम था। 14 वर्षों तक सांसारिक सुखों से दूर रहकर उन्होंने जो आध्यात्मिक गहराई प्राप्त की, वही उनके लेखन की शक्ति बनी। अभावों और गरीबी के बीच भी उन्होंने कभी अपनी लेखनी और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।

लकवा जैसी गंभीर बीमारी से जूझते हुए भी घर की चारदीवारी से उनकी ‘साहित्य साधना’ अनवरत चलती रही, जो उनके अदम्य हौसले का प्रमाण है। लकवा ग्रस्त होने के बाद भोले जी शरीर से टूट चुके थे, लेकिन मन से वे तब भी छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा को आतुर थे। उन्होंने मुझे अपने लिखने-पढ़ने की विवशता बताई, तब मैंने उन्हें ऑनलाइन और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म से जोड़ा।

मैंने उनके लिए ‘मयारू माटी’ का ब्लॉग बनाया, फेसबुक, ट्विटर आदि में पोस्ट करने, यूट्यूब चैनल में वीडियो डालने की बारीकियाँ समझाईं। वे बहुत ही जल्दी अपने आपको डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म में स्थापित कर लिए। इसी तरह वे अपने सेहत का देखभाल करते हुए ऑनलाइन लोगों से जुड़े रहे।

रत्नांचल जिला साहित्य व जनकल्याण समिति, गरियाबंद के अध्यक्ष शायर जितेंद्र सुकुमार ‘साहिर’ ने बताया… भोले जी हमेशा कहते थे कि छत्तीसगढ़ के इतिहास व संस्कृति को यहाँ की अपनी मिट्टी के नजरिए से देखा जाना चाहिए, न कि बाहरी चश्मे से। उनका यह स्वप्न और उनके द्वारा रचित ‘छितका कुरिया, भोले के गोले, दरस के साध, जिनगी के रंग, सब ओखरे संतान, सुरता के बादर, व ढेंकी’ जैसी कृतियाँ आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा मशाल का काम करेंगी।

छत्तीसगढ़ी माटी के इस सच्चे सपूत को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि। उनका स्थान साहित्य जगत में सदैव रिक्त रहेगा।

नए लिखने वाले को हमेशा प्रोत्साहित किया: सोनकर
कवि एवं साहित्यकार संतोष कुमार सोनकर मंडल ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनकी कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकता, वह नए लिखने वाले को हमेशा प्रोत्साहित करते रहे और छत्तीसगढ़ की माटी और यहाँ की लोक कला और लोक संस्कृति को ऊपर उठाने के लिए हमेशा जोर देते रहे।

कवयित्री-लेखिका सुश्री सरोज कंसारी ने कहा कि सुशील भोले जी हमेशा मुझे लिखने के लिए प्रेरित करते थे और रायपुर में आयोजित लघुकथा कार्यक्रम में बुलाते भी थे। वे अति-संवेदनशील, सरल और सहज स्वाभाव के थे, हमेशा नए लेखकों को प्रोत्साहित करते थे और उनके साथ अपने अनुभव साझा करते थे। सदा उन्हें याद किया जाएगा…

कवि गोकुल सेन, टीकमचंद सेन, संतोष सेन, कृष्ण कुमार अजनबी, फनेन्द्र मोदी अश्क बस्तरी, भोज साहू, कवि नूतन लाल साहू, विजय कुमार सिन्हा, प्रदीप कुंवर दादा, केंवरा यदु, गोकुल साहू, राधेश्याम सेन, रेणू शर्मा, श्याम सुंदर साहू, पुरुषोत्तम चक्रधारी, राजेश साहू इत्यादि कवियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।


इसी नंबर को व्हाट्सएप में प्रयोग करें..