पेपर लीक पर अखिलेश यादव का सरकार पर हमला… बोले- शिक्षा व्यवस्था हो रही कमजोर

पेपर लीक पर अखिलेश यादव का सरकार पर हमला… बोले- शिक्षा व्यवस्था हो रही कमजोर

नई दिल्ली, 28 जुलाई। लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर रही है और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने में विफल रही है। अखिलेश यादव ने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है और सरकार केवल वादे कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।

लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान अखिलेश यादव ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने प्रधानमंत्री को बचाने के लिए उनका इस्तीफा लिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शायद यही वजह है कि भाजपा सांसद उनका स्वागत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि केवल इस्तीफा लेने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है।

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि देश में शिक्षा की बुनियाद को कमजोर किया जा रहा है और बड़ी संख्या में प्राथमिक विद्यालय बंद किए जा रहे हैं। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से किन अधिकारियों को हटाया गया और उन्हें वहां किस प्रक्रिया के तहत नियुक्त किया गया था। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार को केवल नीट परीक्षा ही नहीं, बल्कि 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में हुए पेपर लीक मामलों पर भी जवाब देना चाहिए।

समाजवादी पार्टी प्रमुख ने नीट पेपर लीक मामले में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके दर्द की भरपाई संभव नहीं है, लेकिन सरकार को उनके प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

अपने भाषण के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने आपातकाल का दौर नहीं देखा है, लेकिन मौजूदा हालात उन्हें उससे भी अधिक गंभीर प्रतीत होते हैं। उन्होंने पुलिस कार्रवाई और कथित अत्याचारों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए।

अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में जौहर यूनिवर्सिटी पर हो रही कार्रवाई और राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सरकार ऐसी घटनाओं को रोकने में सफल नहीं हो पा रही है, तो वह पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों पर प्रभावी नियंत्रण कैसे स्थापित करेगी। उन्होंने सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।

 

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